ENGLISH GRAMMER

SYNONYMS A Abandon : Desert ,Leave, Quit, Surrender , Renounce ,Forgo Abolish :Annul ,Negate ,Set aside ,Invalidate ,cancel ,Nullify Abrupt : hurried,curt , brief, brusque , sudden Abash : humble ,debase,mortify, reduce , humiliate Abate: decline , diminish , dwindle ,ebb , lessen ,subside Abhor : loathe , despise ,detest abominate ,execrate , dislike Abide […]

औपनिवेशिक भारत में महिला सशक्तिकरण की सफलताएं एवं विफलताएं

स्त्रियों की दासता और दोयम दर्जे की सामाजिक स्थिति का प्राचीन काल में साहसिक एवं तर्कपूर्ण प्रतिवाद किया गया था। मध्यकाल की शताब्दियों के लम्बे गतिरोध के दौर में स्त्री मुक्ति की वैचारिक पीठिका तैयार करने की दिशा में उद्यम लगभग रुके रहे और प्रतिरोध की धारा भी अत्यंत क्षीण रही। आधुनिक विश्व – इतिहास […]

19वीं शताब्दी का महिला सुधार आंदोलन:असमंजस,द्वैधऔर विपथन

19वीं शताब्दी महिलाओं की शताब्दी के रुप में उभर कर सामने आई। यह वह दौर था जब सम्पूर्ण विश्व में महिलाओं की अच्छाई-बुराई, प्रकृति, क्षमताएँ एवं उर्वरा को लेकर गर्मागर्म बहसें चल रही थी। स्त्री की ‘स्थिति‘ पुनः व्याख्यायित हुई। भारतीय मानस पर यूरोप के स्वतंत्रता, तार्किकता और मानवीयता के विचार के सहवŸार् प्रभाव ने […]

दक्षिण एवं पश्चिम भारत में महिला सुधार

विधवा सुधार आन्दोलन को गति देनेवालों में डी0 के0 कार्वे प्रमुख सुधारक थे। उन्हें महाराष्ट्र में विधवाओं के पुनर्वास अभियान का जनक माना जाता था। मद्रास से 1901 ई0 से छपनेवाली इंडियन लेडीज मैगजीन के एक लेख में उनके कार्यां की काफी प्रशंसा की गई थी। अपनी विचारधारा को मूर्त रूप देते हुए डी0 के0 […]

जब महिलाओं ने स्वयं अपने लिए संघर्ष किया

यद्यपि महिलाओं की स्थिति में सुधार की आवाज उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य मुट्ठीभर शिक्षित अभिजन समाज के उन नेक दिल पुरुष समाजसुधारकां और धर्मसुधार आन्दोलन के पुरौधाओं ने ही उठाई थी जो पश्चिमी जनतांत्रिक समाज के आदर्शों और आचरणों से प्रभावित थे। स्त्रियों को दबाकर रखनेवाले धर्मनिषेधों और रीति-रिवाजों की शिकार स्त्रियाँॅ भी कालक्रम में […]

समाजसुधारों के प्रति ब्रिटिश सरकार का नजरिया

19वीं शताब्दी महिलाओं की शताब्दी के रुप में उभर कर सामने आई। यह वह दौर था जब सम्पूर्ण विश्व में महिलाओं की अच्छाई-बुराई, प्रकृति, क्षमताएँ एवं उर्वरा को लेकर गर्मागर्म बहसें चल रही थी। स्त्री की ‘स्थिति‘ पुनः व्याख्यायित हुई। भारतीय मानस पर यूरोप के स्वतंत्रता, तार्किकता और मानवीयता के विचार के सहवŸार् प्रभाव ने […]

भारत में नारीवाद का उद्भव और विकास

भारत में नारीवाद का विकास महिला आन्दोलन से पृथक 19वीं शताब्दी के अंतिम दशकों में हुआ तथा 20वीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में परिपक्वावस्था में पहुँचा। इस दौर में इसकी उत्पिŸा के पीछे विभिन्न कारणों की भूमिका महत्वपूर्ण रही जिनमें प्रमुख है- औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था की उत्पिŸा, सामाजिक सुधार आन्दोलनों द्वारा उत्पन्न संभावनाएँ, आधुनिकता का नया […]

बालविवाह एक सामजिक बुराई :तब और अब

समकालीन यूरोपीय लेखकों ने 19 वीं शताब्दी के भारत में प्रचलित बालविवाह का वर्णन किया है। क्रेफर्ड लिखता है कि भारत में यह प्रथा प्राचीन काल से चली आ रही है। नवयौवना को शीध्र अपने पति से मिलने नहीं दिया जाता है और उसे कुछ समय तक पति की प्रतिक्षा करनी पड़ती है। 19 वीं […]

बालशिशु हत्या और समाजसुधार

उन्नीसवीं शताब्दी में भारत के सभी भागों में औेर करीब – करीब सभी राजपूत कौमों में लड़कियां को मार डालने की एक प्रथा सदियों से चली आ रही थी। उन्होंने अपने समाज में बालिका शिशु हत्या के अधार्मिक एवं अमानवीय रिवाज को बनाया औेर उसे भलीभाँॅति निभाते भी चले आ रहे थे। यह क्रूर कार्य […]