भारतीय इतिहास का सूत्रकाल

प्राचीन भारत के इतिहास में सूत्रकाल का समय 600ई.पूर्व से 300ई.पूर्व तक माना जाता है।इसकाल में वैदिक संहिताओं को सरल बनाने के लिए वेदांगों की रचना की गयी जनकी रचना छः है।इनके नाम है- 1.शिक्षा : शिक्षा को उच्चारण विधि भी कहा जाता है।वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण एवं शुद्ध स्वर क्रिया की विधियों के […]

भारतीय दर्शन का मूलाधार : षड्दर्शन

षड्दर्शन में जीवन चक्र से मुक्ति के लिए छः व्यवस्थाएं की गयी है।इन्हें तीन वर्गों में विभाजित किया गया है।1.न्याय और वैशेषिक 2.सांख्य और योग 3.मीमांसा और वेदांत। 1.न्याय :न्याय दर्शन का प्रतिपादन अक्षपाद गौतम ने किया था।न्याय का तात्पर्य हेतुविद्या या तर्कशास्त्र है।वात्सायायन के अनुसार तार्किक प्रमाणों के नियमों द्वारा ज्ञान की वस्तुओं की […]

असनातनी मतावलम्बी और दर्शन

600ई.पूर्व में पुरोहितवाद और ब्राहणों द्वारा स्थापित चतुःवर्णीय व्यवस्था के खिलाफ घोर प्रतिक्रिया हुई और उतरी भारत में कई असनातनी सम्प्रदाय उठ खड़े हुए।ये लोग जितना वैदिक क्रियाओं के विरोधी थे उतना ही बौद्ध धर्म के भी खिलाफ थे।भगवान बुद्ध के छः प्रमुख विरोधी बताये जाते है -1.मक्खलिपुत्त गोशाल 2.पुरण काश्यप 3.अजित केशकम्बलिन 4.पाकुध कच्चायन […]

वैष्णव या भागवत सम्प्रदाय

आजकल भागवत या वैष्णव धर्म का जो रूप प्रचलित है,वह दूसरी सदी ई.पूर्व के बाद का है।भागवत धर्म की दो शाखाएँ थी-भागवत एवं शैव।कालांतर में गणपत्य सम्प्रदाय,सूर्य सम्प्रदाय और शाक्त सम्प्रदाय भी इससे जुड़ गए।ऋग्वेद में कृष्ण का उल्लेख एक ऋषि के रूप में मिलता है।छान्दोग्य उपनिषद में कृष्ण का वर्णन देवकी के पुत्र एवं […]

जैन धर्म और महावीर

जैनों के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी को जैनधर्म का संस्थापक माना जाता है।महावीर का जन्म 540 ई.पूर्व वैशाली जिले कुण्डग्राम में हुआ था।पिता सिद्धार्थ ज्ञातृक कुल के क्षत्रिय थे,उनकी माता त्रिशला लिच्छवी राजकुमारी थी।पत्नी का नाम यशोदा था और भाई का नाम नन्दीवर्मन था।वर्धमान महावीर पहले ऋषभदत्त ब्राह्मण की पत्नी देवनंदा के गर्भ में आये […]

गौतम बुद्ध और बौद्ध दर्शन

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई.पूर्व में नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन (आधुनिक रुमिन्देइ)में हुआ था।पिता शुद्धोधन,शाक्य गण के प्रधान और माता मायादेवी कोलिय गणराज्य की कन्या थी।गौतम को देखकर कालदेव तथा कौण्डिन्य ने भविष्यवाणी की थी कि बालक या तो चक्रवर्ती राजा होगा या सन्यासी। यशोधरा उनकी पत्नी थी जो बिम्बा,गोपा,भद्रकच्छाना आदि नामों […]

उत्तरवैदिककालीन भारत

उत्तरवैदिककालीन इतिहास की जानकारी ऋग्वेद को छोड़कर अन्य तीन वेदों यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद से मिलती है।इसके अतिरिक्त ब्राह्मण,आरण्यक तथा उपनिषद इस काल की जानकारी के लिए महत्वपूर्ण स्रोत साबित हुए है।ये सभी उत्तरकालीन वैदिक ग्रंथ लगभग 1000ई.पूर्व से 500ई.पूर्व के बीच उत्तरी गंगा के मैदान में रचे गए थे।इस क्षेत्र से लगभग 700 उत्तरवैदिक […]

वैदिककालीन भारत

भारतीय इतिहास में वैदिक काल को दो स्पष्ट भागों में विभाजित किया जाता है। 1. पूर्व वैदिक या ऋग्वैदिक काल-1500BC से 1000BC तक। 2.उत्तरवैदिक काल- 1000BC से 600BC तक। ऋग्वैदिक काल:- भारत में आर्य भाषाभाषियों का आगमन 1500 ई.पूर्व से कुछ पहले हुआ था। आर्यों का मूल निवास आल्पस के पूर्वी क्षेत्र में जो यूरेशिया […]

भारत में सामन्तवाद

18वीं शताब्दी के यूरोपीय विद्वानों ने सामन्तवाद की अवधारणा का प्रवर्तन शासन एवं समाज से जुड़ी उन सामान्य संस्थाओं के निरूपण के लिए किया था जो रोमन-जर्मन संश्लेषण के फलस्वरूप विकसित हुई थी।उच्च-मध्ययुग में यह संश्लेषण अपनी समृद्धि के चरम पर थी।सामन्तवाद की उत्पत्ति लैटिन शब्द फ्युडम(Feudum)से हुई है जो अंग्रेजी शब्द फीफ़ (Fief)से बना […]

बिहार पंचायतीराज अधिनियम,1993

सत्ता के विकेंद्रीकरण को तीसरी सरकार के रूप में पंचायतों में केन्द्रीभूत करने के उद्देश्य से 23 अप्रैल 1993 को संविधान के 73वें संशोधन किया गया।इसके पीछे यह मंशा कायम थी कि सत्ता के श्रोत को निचले स्तर तक ले जाया जाय और जनता की इच्छाओं एवं अपेक्षाओं के अनुरूप विकास का मॉडल स्थापित किया […]